ऐसे बनाए अपने जीवन को सुखमय सबके सुख में हमारा सुख निहित हो जाना चाहिए । सुखी जीवन की एक और शर्त यह भी है कि हम शुद्ध, सात्विक और धार्मिक जीवन बिताये । धर्म का सम्बन्ध हृदय से है न कि इन्द्रियों से । इससे मन को बड़ी शान्ति मिलती है फलत: सुख का संचार होता है । कर्म के बाद फल को ईश्वर पर सौंप कर ही सदा सुखी हो सकता है । समय का सदुपयोग भी सुख को बढ़ावा देता है । हमें अपना खाली समय अच्छा साहित्य बढ़ाने में लगाना चाहिए । संगीत, चित्रकला, नृत्य जैसे कलात्मक कामों में हमें रुचि बढ़ानी चाहिए । इनसे भी आत्मिक आनन्द मिलता है । काम (sex) प्रक्रिया को विशेष विवेक के साथ समझें। पति-पत्नी मिलन को समाज मान्यता देता है कि आप दोनों परस्पर संतान उत्पन्न करो। सबके माता-पिता ने संतानोत्पत्ति की प्रक्रिया की जिसे संभोग कहते हैं, किया। जिससे अपना तथा अपने भाई-बहनों का जन्म हुआ। तो विचार करें कि यह क्रिया कितनी पवित्रा तथा अच्छी है जिससे अपने को अनमोल मानव शरीर मिला है। कोई डाॅक्टर बना, कोई सैनिक, कोई मंत्राी तो कोई इन्जीनियर बना है। कोई किसान बना है जिसने सबको अन्...