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सुखी जीवन के टिप्स........

ऐसे बनाए अपने जीवन को सुखमय   सबके सुख में हमारा सुख निहित हो जाना चाहिए । सुखी जीवन की एक और शर्त यह भी है कि हम शुद्ध, सात्विक और धार्मिक जीवन बिताये । धर्म का सम्बन्ध हृदय से है न कि इन्द्रियों से । इससे मन को बड़ी शान्ति मिलती है फलत: सुख का संचार होता है । कर्म के बाद फल को ईश्वर पर सौंप कर ही सदा सुखी हो सकता है । समय का सदुपयोग भी सुख को बढ़ावा देता है । हमें अपना खाली समय अच्छा साहित्य बढ़ाने में लगाना चाहिए । संगीत, चित्रकला, नृत्य जैसे कलात्मक कामों में हमें रुचि बढ़ानी चाहिए । इनसे भी आत्मिक आनन्द मिलता है । काम (sex) प्रक्रिया को विशेष विवेक के साथ समझें। पति-पत्नी मिलन को समाज मान्यता देता है कि आप दोनों परस्पर संतान उत्पन्न करो। सबके माता-पिता ने संतानोत्पत्ति की प्रक्रिया की जिसे संभोग कहते हैं, किया। जिससे अपना तथा अपने भाई-बहनों का जन्म हुआ। तो विचार करें कि यह क्रिया कितनी पवित्रा तथा अच्छी है जिससे अपने को अनमोल मानव शरीर मिला है। कोई डाॅक्टर बना, कोई सैनिक, कोई मंत्राी तो कोई इन्जीनियर बना है। कोई किसान बना है जिसने सबको अन्...
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राजनीति-2019

राजनीति 2019 आज हम राजनीति 2019 से बात करेंगे अब जो यह माहौल चल रहा है राजनीति का गरमा गरम माहौल है इस माहौल में तो दोस्त भी दुश्मन हो रहे हैं और दुश्मन भी दोस्त हो रहे हैं गजब का माहौल है यह हम बात पर आते हैं अभी चुनाव हुए थे 2018 में विधानसभा चुनाव थे पांच राज्यों के थे राजस्थान मध्य प्रदेश आदि राज्यों में बीजेपी का जिस प्रकार सफाया होता दिख रहा है उस प्रकाश से तो यह लग रहा है कि आने वाले समय में बीजेपी के बीच ही नष्ट हो जाएगा इसका मुख्य कारण यह है कि बीजेपी सरकार के उच्च पदाधिकारी लोग न्याय की बजाय लगातार अन्याय कर रहे तथा इसका खामियाजा आम जनता को भी भुगतना पड़ रहा था लेकिन चुनाव के टाइम जनता ने अपने मत की ताकत दिखा कर यह साबित कर दिया कि भारतीय लोकतंत्र आज भी लोकतांत्रिक है इस पर किसी भी राजनीतिक एवं पैसे वालों का दबाव नहीं है अब बात आती है लोकसभा चुनाव 2019 जिसमें लगभग सभी सांसदों का चुनाव होगा और जिस भी पार्टी का बहुमत होगा उस पार्टी से नया प्रधानमंत्री चुना जाएगा कहने में तो ऐसा लगता है कि आने वाले समय में श्रीमान नरेंद्र मोदी जी की परीक्षा है और यह एक ऐसी परीक्षा है जिसमे श्...

4.फिजूल खर्चे से बचे....

विवाह में ज्ञानहीन नाचते हैं  एक दिन समाचार पत्रा में पढ़ा कि रोहतक का लड़का भिवानी विवाह के लिए कार में जा रहा था। उसके साथ दोनों बहनों के पति भी उसी कार में सवार थे। पहले दिन सब परिवार वाले (बहनें, माता-पिता, भाई-बटेऊ, चाचे-ताऊ) डी.जेबजाकर नाच रहे थे। उधमस उतार रखा था। कलानौर के पास दुल्हे वाली गाड़ी बड़े ट्राले से टकराई। सर्व कार के यात्राी मारे गए। दुल्हा मरा, दोनों बहनें विधवा हुई। एक ही पुत्रा था, सर्वनाश हो गया। अब नाच लो डी.जे. बजाकर। परमात्मा की भक्ति करने से ऐसे संकट टल जाते हैं। इसलिए मेरे (रामपाल दास के) अनुयाईयों को सख्त आदेश है कि परमात्मा से डरकर कार्य करो। सामान्य विधि से विवाह करो। इस गंदे लोक (काल के लोक) में एक पल का विश्वास नहीं कि कब बिजली गिर जाए। नशा करता है नाश नशा चाहे शराब, सुल्फा, अफीम, हिरोईन आदि-आदि किसी का भी करते हो, यह आपका सर्वनाश का कारण बनेगा। नशा सर्वप्रथम तो इंसान को शैतान बनाता है। फिर शरीर का नाश करता है। शरीर के चार महत्वपूर्ण अंग हैं:- 1. फेफड़े, 2. जिगर (लीवर), ...

3॰ मानवता का सम्मान

इन्सानियत जरूरी इनसानियत व मानवता सबसे बड़ा धर्म है । कहते हैं दुनिया में कोई ऐसी शक्ति नहीं है जो इनसान को गिरा सके, इन्सान ,इन्सान द्वारा ही गिराया जाता है । दुनिया में ऐसा नहीं है कि सभी लोग बुरे हैं, इस जगत में अच्छे-बुरे लोगों का संतुलन है । आज संस्कारों का चीरहरण हो रहा है ,खूनी रिश्ते खून बहा रहे हैं । संस्कृति का विनाश हो रहा है । दया ,धर्म ,ईमान का नामेानिशान मिट चुका है ।इनसान खुदगर्ज बनता जा रहा है । दुनिया में लोगों की सोच बदलती जा रही है । निजी स्वार्थों के लिए कई जघन्य अपराध हो रहे हैं। बुराई का सर्वत्र बोलबाला हो रहा है। आज ईमानदारों को मुख्यधारा से हाशिए पर धकेला जा रहा है।गिरगिटों व बेईमानों को गले से लगाया जा रहा है मानव ,मानव से भेदभाव रहा है। उंच-नीच का तांडव हो रहा है। खून का रंग एक है फिर भी यह भेदभाव क्यों। यह बहुत गहरी खाई है इसे पाटना सबसे बडा धर्म है। आज लोग बिलासिता पर हजारों -लाखों रूपये पानी की तरह बहा देते हैं ,मगर किसी भूखे को एक रोटी नहीं खिला सकते। इसका मुख्य कारण है सत्संग का अभाव। नफरत को छोड देना चाहिए। प्रत्येक मनुष्य की सहायता करनी चाहिए।...

2.मात-पिता तथा गुरु का परम आदर

मन की व्यथा   प्रत्येक मानव को अपने माता-पिता और गुरु का सम्मान करना चाहिए। क्योंकि धरती पर यह तीनों भगवान के प्रतिनिधि के रूप में हैं। जो इनकी सेवा करता है उस पर ईश्वर की कृपा स्वत: ही हो जाती है। माता- पिता और गुरु से बड़ा हितैषी विश्व में कोई नहीं है। इन तीनों का सदैव आदर करना चाहिए। उनके दिखाए रास्ते पर चलें। प्रत्येक माता-पिता की तमन्ना होती है कि मेरी संतान योग्य बने। समाज में बदनामी न ले। अच्छे चरित्रा वाली हो, आज्ञाकारी हो। वृद्धावस्था में हमारी सेवा करे। हमारी बहु हमारे कहने में चलने वाली आए। समाज में हमारी इज्जत रखे। वृद्धावस्था में हमारी सेवा करे। प्यार से व्यवहार करे। सत्ययुग, त्रोता, द्वापर तक यह मर्यादा चरम पर रही। सब सुखी जीवन जीते थे। कलयुग में कुछ समय तक तो ठीक रहा, परंतु वर्तमान में स्थिति विपरीत ही है। इसे सुधारने का उद्देश्य लेखक (रामपाल दास) रखता है। आशा भी करता हूँ कि भगवान की कृपा से ज्ञान के प्रकाश से सब संभव हो जाता है, हो भी रहा है और होगा, यह मेरी आत्मा मानती है। माता का संतान के प्रति प्यार:- एक लड़क...

1.अपने जीवन को साधारण बनाए

व्यक्तिव का विकास   जीवन में सादगी लाना और तुच्छ विचारों को हृदय से दूर कर देना अपने आप में महान् गुण है । अपने पर गर्व करना एक बड़ा दोष है । जीवन को सादा बनाने के लिए इस दोष का दूर करना नितांत आवश्यक है । सादा जीवन व्यतीत करनेवाला विनयशील, शिष्ट तथा आत्मनिर्भर होता है । संसार में वे ही लोग अमर होते है जिनकी आत्मा महान् होती है और जो संसार में अपने पीछे ऐसे आदर्श छोड़ जाते हैं, जिनसे प्रेरणा पाकर अगली पीढ़ी अपना मागदर्शन पा सके । अधिकांशत: वे मध्यम वर्ग के घरों में पलते हैं, परंतु इतने सादे जीवन में भी उनमें उच्च विचार जन्म लेते हैं और उन्हीं में वे विकसित भी होते हैं । मनुष्य में विनय, औदार्य, सहिष्णुता, साहस, चरित्र-बल आदि गुणों का विकास होना अति आवश्यक है । इनके बिना उसका जीवन सफल नहीं हो सकता । इन गुणों का प्रभाव उसके जीवन और विकास पर अवश्य पड़ता है । रहन-सहन, वेशभूषा, आचार- विचार का एक स्तर होना चाहिए । बड़े-से-बड़े कष्ट में भी धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए; अपव्ययी नहीं होना चाहिए और विपुल मात्रा में धन होने पर भी धन का अपव्यय नहीं करना चाहिए । हमने अपनी सोच बदलनी है:- जैसे ...